मनस-विद

299.00

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Description

मन क्या है? इसके परे क्या है? मन कैसे वास्तविकता को आकार देता है? और चेतना कैसे उससे परे जाती है। क्या हो? अगर मन आपका मालिक न होकर आपकी चेतना का एक प्रवेश द्वार हो? क्या हो अगर चेतना विचार की उपज न होकर, उसकी पीछे की शाश्वत वास्तविकता हो? पुस्तक “मनस-विद” पाठकों को मानवीय चेतना की गहराइयों में एक परिवर्तनकारी यात्रा लिए आमंत्रित करती है।मनोविज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, दर्शन और प्राचीन ज्ञान की अंतर्दृष्टियों का सम्मिश्रण करते हुए, यह विचारोत्तेजक पुस्तक; विचार, अनुभूति और स्वयं की प्रकृति की सूक्ष्म परतों की पड़ताल करतीहै। चाहे आप सत्य के साधक हों, मनोविज्ञान के विद्यार्थी हों, या केवल अपने मन के बारे में जानने जिज्ञासु हों। यह पुस्तक आपके आंतरिक संसार की गहरी समझ को जागृत करने के लिए सैम,सम्यक चिंतन और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। “मनस-विद”, पुस्तक आपको वहाँ तक लेकर जाती है, जहाँ मौन विचारों से ज़्यादा ज़ोर से बोलता है, और विचार किसी विशाल और कालातीत चीज़ में विलीन हो जाते है।आत्मनिरीक्षण और प्राचीन ज्ञान के माध्यम से, यह पुस्तक मानसिक कंडीशनिंग की परतों को उधेड़कर, चेतना के शांत स्वरूप को प्रकट करती है।

Additional information

Weight 0.100 kg
Dimensions 14.8 × 21 × 14.8 cm

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